जलती चिता हूँ
या हवन हूँ
उन हवन पर सजी देहों का
मैं ही हविष्य हूँ
महाश्मशान मे सीखाती
बैराग हूँ
दिन रात जलती आग हूँ
मृत्यु का मौन हूँ
मोक्ष का द्वार हूँ
हाँ, मैं मणिकर्णिका हूँ
गंगा में मिलती राख हूँ
मैं निर्वाण गति हूँ
जन्म जन्मांतर की
घुमावदार राह का
हाँ ...मैं अंत हूँ
मन के घाट पर
ढ़ूंढ़ती कर्णफूल हूँ
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