वो जो चला गया अब लौटेगा नहीं अलविदा हमेशा तकलीफ़देह होता है नहीं आसान होता किसी को जाने देना विदा का कोई सहज नियम क्यूं नहीं होता? क्यो विदा हमेशा भारी होती है ? क्यो नहीं प्रस्थान आसान होता ? क्यो पंचतत्व का विलय इतना कठिन होता है? विदा के आगे पूरा जीवन पूरा शब्दकोश पूरी उपमाएं पूरी सृष्टी हल्की लगने लगती है
अपने मन के उतार चढ़ाव का हर लेखा मैं यहां लिखती हूँ। जो अनुभव करती हूँ वो शब्दों में पिरो देती हूँ । किसी खास मकसद से नहीं लिखती ....जब भीतर कुछ झकझोरता है तो शब्द बाहर आते है....इसीलिए इसे मन का एक कोना कहती हूँ क्योकि ये महज शब्द नहीं खालिस भाव है