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संदेश

अन्तर्मन की ओर

माना कि मुखरता स्वभाव है लेकिन कभी कभी इसे अंदर की ओर समेटना होता है अक्सर हम  बाहरी दुनिया में रमने लगते है लोगों को जानने समझने की चेष्टा में कही न कही खुद को समझ से परे कर देते है निकल जाते है दूर  एक ऐसी राह पर जहाँ जमावड़ा होता है तथाकथित अपनों का जहाँ हम सबको पाते है सिवाय खुद के खुद को भुलकर भी  मन संतुष्ट होता है  कि हम अपनों के बीच है लेकिन एक वक्त पर इस भ्रम को टूटना होता है अपनों पर आश्रित होने के बजाय हमे खुद को पुकारना होता है स्वयं को पाना होता है दूर गयी राह से लौट आना होता है खुद को भीतर ही भीतर समेटना होता है कछुए की भाँती एक खोल में, एक मजबूत खोल में.... अपने स्वं को स्थापित करना होता है हमे पाना होता है खुद को हमे अन्तर्मन की ओर मुखर होना होता है

उन्मुक्तता

मैं संपूर्ण नहीं थी पर मैं सही थी बहुत सी जगहों पर मेरा सही  तुम्हारे लिये गलत था तुम्हारा सही मेरे लिये गलत था सही, गलत नहीं हो पाया गलत, सही नहीं हो पाया और  हम खड़े रहे  अपने अपने छोर को पकड़े ना डोर तुमने छोड़ी ना डोर मैंने छोड़ी बंधी रही मैं कही न कही उसी छोर से लेकिन जानती हूँ मैं मुझे किनारे पर ही रहना है जब चाहूँ तब डोर छोड़ सकू मुझे डोर को पकड़कर  तुम तक आने की जरुरत नहीं अपनी उन्मुक्तता भी इतनी ही प्रिय है मुझे जितना कि तुमसे जुड़ा यह छोर 

सपना

तुम्हे पता है 'नीरज' कहते है कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करते है सच पुछो तो सपने भी कहा मरते है ये अलग बात है कि पूरे नहीं होते  लेकिन उन्हे देखना हर बार सुखद होता है इन सपनों में एक पुरा जीवन होता है सिर्फ तुम्हारा जीवन तुम्हारा सपना जिसका कोई साक्षी नहीं कोई भागीदार नहीं नितांत अकेला एकछत्र  एकांत में मुसकाता सा जो पुरा ना होकर भी  टिमटिमाता है तुम्हारी आँखों में  आजीवन सहेजा जाता है अंतस के अंतिम छोर में 

चक्रव्यूह

जिससे आप प्यार करते हो उसे कभी बददुआ नहीं दे सकते बाहर से कड़वा बोल सकते है पर अंदर की ओर एक मीठा लबालब झरना होता है आप उनकी गलतियों को बर्दाश्त नहीं कर सकते आप टोकते है उन्हे उनकी हर गलती पर दिशाहीन राहों पर बढ़ने नहीं दे सकते नहीं देख सकते उन्हे परेशानियों से जुझते हुए आप आगाह करते है उन्हे भावी चक्रव्यूहों के बारे में लेकिन फिर भी अक्सर होनी को होना रहता है स्नेह प्यार को हारना होता है आप स्तब्ध रह जाते है और  एक चक्रव्यूह सब निगल जाता है जिसमे आप स्वयं भी होते है

मौन

वो मूक रही बहुत बार बहुत जगह कभी प्रश्न का औचित्य नहीं समझ पायी इसलिए निरुत्तर रही कभी कुछ कड़िया नहीं जोड़ पायी उस वार्ता की, जो हो नहीं पायी जबकि वो करना चाहती थी कभी शब्द गले में अटक कर रह गये उसके लाख चाहने के बावजूद वो पलायन कर गये  अक्षर अक्षर जोड़कर उसने एक वाक्य बनाया जिसे कोई पढ़ नहीं पाया फिर उसने कई वाक्य बनाये और कविताएं रच डाली उसके मन में डोलती रहती है ऐसी हजारों कविताएं जिन तक कोई पहूँच नहीं पाता इसलिए उसने मौन चुना एक ऐसा संवाद  जो हजार वार्ताओं पर भारी पड़ा   

हलाहल

उसका घाव नासूर है जो भरेगा नहीं कभी उसके गले में हलाहल है जो नीचे उतरेगा नहीं कभी उसके ह्रदय में सिर्फ प्रेम है जो बाहर निकलेगा नहीं कभी  #क्षणिका

चॉकलेट

चॉकलेट राहत देती है मन को खुश करती है लो बीपी में मदद करती है कमजोरी में ऊर्जा देती है चॉकलेट डोपामाइन होती है जो शरीर में खुशी की तरंग को छेड़ देती है चॉकलेट मुहँ में यूँ पिघलती है जैसे घुलता है मक्खन  चॉकलेट इजहार होती है प्यार में इकरार होती है तकरार में इंकार होती है समझो तो हर बात का इलाज होती है बात बस इतनी सी है हर वक्त अपनी बायीं जेब में  चॉकलेट के कुछ टुकड़े रखो सुना है कि.... आज चॉकलेट डे है