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संदेश

माँ

मैं पुकारती हूँ तुम्हे पर वो पुकारना शुन्य में विलिन हो जाता है जब भी दर्द में होती हूँ किसी को न दिखने वाले मेरे आँसू छलकना चाहते है तेरे आगोश में पर वो जज्ब नहीं हो पाते ते...

अपनी कहानी बयां करता एक शहर......हम्पी

मैं हम्पी हूँ......1336 में हरिहर राय और बुक्का राय नाम के दो भाईयों ने मेरी नीवं रखी थी। लेकिन मेरा इतिहास इससे भी कही पुराना है । पुरातन काल में मुझे किष्किंधा नाम से भी जाना जाता थ...

प्रेम

क्या आसान है प्रेम को समझ पाना शायद नहीं.... पर मुश्किल भी नहीं, लेकिन इसकी परिभाषा इतनी गहन बना दी गई है कि साधारण इंसान समझ ही न पाये असल में प्रेम परिभाषाओं के परे है बस महसूस ...

क्या है प्यार

क्या है प्यार ? सोशियल मीडिया पर फैला मायाजाल या नर्म मखमली शब्दों का जामा.... चंद मुलाकातों की मोहब्बत या एक जुनून अंधा.... हवा में उड़ती ऊँची पतंग या कच्चे धागे सी उलझती बहस..... चम...

युद्ध विकल्प नहीं हो सकता

नहीं, युद्ध कभी विकल्प नहीं हो सकता कभी सोच कर देखो उस घर की चौखट को जिसे लाँघकर जाने वाला अब लौटकर नहीं आयेगा,लेकिन उधड़ती रंग की पपड़ियों में से एक शहीद के घर होने का गर्व झाँ...

आज का दिन

आज मन बड़ा खुश है....इतना खुश कि शब्दों से बयां ही नहीं कर सकती । रगों में जैसे भारतीयता दौड़ रही है। आँखों में एक गुरूर सा छाया है। चेहरे पर जैसे  एक ओज है । आज की तो जैसे हवा भी गुनग...

अध्यात्म

तुम देह को भोग कर आना अपना सारा इश्क़ करके आना जब बातों से जी भर जाये तब आना तुम तब आना जब सूरज अस्त होते होते थोड़ा सा बचा हो सिंदूरी आसमाँ रात की अगवाई में सजा हो पंछी अपने घरों...