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संदेश

मैक्लोडगंज

मै अभी mcleodganj में हूँ ।मैक्लॉडगंज वह जगह है, जहां पर 1959 में बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा अपने हजारों अनुयाइयों के साथ तिब्बत से आकर बसे थे,इसी वजह से यह स्थान पूरे विश्व में प्रसिद्ध ह...

गुरू

राजकुमार सिद्धार्थ ने जब महल छोड़ा था तो उन्हें एक गुरू की तलाश थी जो मुक्ति का मार्ग दिखा सके, और उन्होने दो आचार्यों आलार कालाम और उद्रक से आध्यात्मिक शिक्षा ली।  'अपदार्...

प्रकृति और प्रेम

सृष्टि..... ईश्वर की बनायी सबसे बेहतरीन रचना। सब अद्भुत और खुबसुरत है यहाँ, अगर हम महसूस कर सके तो.... लेकिन अक्सर होता यह है कि हम सुंदरता को महसूस करना तो दूर, जी भर निहार भी न पाते,ल...

आँसू

यूँ तो नमकीन ही होते है पर फिर भी हर आँसू में फर्क होता है वो एक आँसू कुछ ऐसा होता है जो 'सब' से जुदा होता है वो सिर्फ कांधा नही भिगोता वो सिंचित करता है मन के सूखे बंजर रेगिस्ता...

उर्जा

सकारात्मक शब्द आपको हमेशा उर्जा देते है। आपके हौसलों को एक उड़ान देते है ,लेकिन जब यह सकारात्मकता अनायास निकल कर आये तो शायद यह उर्जा का विशुद्ध रूप होता है और आप एक संतुष्ट...

न भाती यह दुनिया

मैं कभी दुनियादारी न सीख पाई, कभी किसी ने सिखाया भी नहीं ,जो देखा वही जाना और वही समझा।  बात अजीब लग सकती है कि चार दशक इस दुनिया में बिताने के बाद भी मैं इसे समझ न पायी।     अपने ...

अध्यात्म

यूँ तो ईश्वर को लेकर मेरी कोई अवधारणा नहीं, पर वो है और मुझसे प्रेम करता है,मेरी हर कारगुज़ारी पर उसकी पैनी नजर रहती है,उसके सीसीटीवी में कैद मेरी हर गतिविधि होती है, यह जानते बूझते भी मैं सतर्क नहीं रहती क्योकि मुझे पता है, मेरा ईश्वर मुझसे प्रेम करता है और यह दावा मैं इसलिये कर सकती हूँ क्योकि मैने उसे पाने के कभी प्रयास ही नहीं किये, लेकिन फिर भी वो हर वक्त मेरे साथ उपस्थित  रहा।           मै नहीं जानती कि मैं आस्तिक हूँ या नास्तिक लेकिन हाँ, मैं आध्यात्मिक हूँ पर आश्चर्य की बात यह है कि मुझे अध्यात्म की गहराईयों का भी न पता.......न मुझे शास्त्रों का ज्ञान ना गूढ़ बातों की जानकारी लेकिन फिर भी मैं ईश्वरीय शक्ति को महसूस करती हूँ, हर पल,और शायद यही अध्यात्म  है और अगर यह अध्यात्म नहीं है तो शायद मै आध्यात्मिक भी नहीं हूँ। बहुत बार उत्सुकता होती है इसे जानने की, समझने की..... पर फिर डर लगता है कि ज्ञान आते ही कही मेरा ईश्वर मुझसे दूर न हो जाये क्योकि जो मुझे सहज उपलब्ध है, उसे और अधिक पाने का प्रयास क्यो ?ज्ञान की अवधारणाओं और तर्क वितर्क से परे मन ...