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कश्मीर

खुशियाँ क्या होती है?
आज चहकते चिनार से पूछिये
घाटी की वादियों से पुछिये
पुछिये उन नजारों से
जो सहमे सहमे से जन्नत की सैरगाह कहलाते थे
खुशियां क्या होती है ?
उन लाखों धड़कते दिलों से पुछिये
जो अपने ही घर में पराये से रहते थे
पुछिये उन पहाड़ों से
जो खुशी से आज थोडें ऊँचें से अधिक है
उन झीलों से पुछिये
जो आज झिलमिला कुछ ज्यादा रही है
देवदार के पेड़ आज आमादा है
आसमान को गले लगाने
घाटी की सड़के हमेशा की तरह लहरदार है
पर आज बेखौफ कुछ ज्यादा है
पुछिये उस लाल चौक से
जो विरान सा था....
देश का मस्तक होकर भी मुकुट विहिन था
उसकी खुशी आज बेहद बेहिसाब है
बदल गई है नजर
सज गया है हर मंजर
पुछिये मेरे कश्मीर से
जहाँ आज खुशियाँ दस्तक दे रही है

टिप्पणियाँ

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Alaknanda Singh ने कहा…
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Alaknanda Singh ने कहा…
आपका ल‍िखा सदैव की भांत‍ि शानदार होता है ...

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उम्मीद

लाख उजड़ा हो चमन एक कली को तुम्हारा इंतजार होगा खो जायेगी जब सब राहे उम्मीद की किरण से सजा एक रास्ता तुम्हे तकेगा तुम्हे पता भी न होगा  अंधेरों के बीच  कब कैसे  एक नया चिराग रोशन होगा सूख जाये चाहे कितना मन का उपवन एक कोना हमेशा बसंत होगा 

मन का पौधा

मन एक छोटे से पौधें की तरह होता है वो उंमुक्तता से झुमता है बशर्ते कि उसे संयमित अनुपात में वो सब मिले जो जरुरी है  उसके विकास के लिये जड़े फैलाने से कही ज्यादा जरुरी है उसका हर पल खिलना, मुस्कुराना मेरे घर में ऐसा ही एक पौधा है जो बिल्कुल मन जैसा है मुट्ठी भर मिट्टी में भी खुद को सशक्त रखता है उसकी जड़े फैली नहीं है नाजुक होते हुए भी मजबूत है उसके आस पास खुशियों के दो चार अंकुरण और भी है ये मन का पौधा है इसके फैलाव  इसकी जड़ों से इसे मत आंको क्योकि मैंने देखा है बरगदों को धराशायी होते हुए  जड़ों से उखड़ते हुए 

सीख जीवन की

ये एक बड़ा सा पौधा था जो Airbnb के हमारे घर के कई और पौधों में से एक था। हालांकि हमे इन पौधों की देखभाल के लिये कोई हिदायत नहीं दी गयी थी लेकिन हम सबको पता था कि उन्हे देखभाल की जरुरत है । इसी के चलते मैंने सभी पौधों में थोड़ा थोड़ा पानी डाला क्योकि इनडोर प्लांटस् को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती और एक बार डाला पानी पंद्रह दिन तक चल जाता है। मैं पौधों को पानी देकर बेफिक्र हो गयी। दूसरी तरफ यही बात घर के अन्य दो सदस्यों ने भी सोची और देखभाल के चलते सभी पौधों में अलग अलग समय पर पानी दे दिया। इनडोर प्लांटस् को तीन बार पानी मिल गया जो उनकी जरुरत से कही अधिक था लेकिन यह बात हमे तुरंत पता न लगी, हम तीन लोग तो खुश थे पौधों को पानी देकर।      दो तीन दिन बाद हमने नोटिस किया कि बड़े वाले पौधे के सभी पत्ते नीचे की ओर लटक गये, हम सभी उदास हो गये और तब पता लगा कि हम तीन लोगों ने बिना एक दूसरे को बताये पौधों में पानी दे दिया।       हमे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे, बस सख्त हिदायत दी कि अब पानी बिल्कुल नहीं देना है।      खिलखिलाते...