नहीं जरुरत है हमे किसी भाषा की
या फिर किसी लिपि की
मत ईजाद करो कुछ तौर तरीके
किसी के दिल में घर करने को
आँखों को पढ़ने के लिये
तुम्हे कुछ सीखना नहीं पड़ेगा
नहीं जरुरत गहन विश्लेषण की
नहीं जरुरत भाषाई सुंदरता की
समझो....... कि हम मे से कोई भी
मोहताज नहीं है शब्दों के
संवेदनशील है हम मुक रहकर
मौन को जी कर
सच कहती हूँ.....
जरुरत नहीं है हमे किसी भाषा की
किसी लिपि की
तुम बस मुस्कुराया करो
खिलखिलाया करो
और कभी मन करे....तो
दो आँसु बहाया करो
इनकी कोई लिपि नहीं होती....फिर भी
हर भाषाई जानकार समझ जाता है इन्हे
ये मानवता की भाषा है
तुम बस इसे समझना सीखो
और हाँ.....
तुम चित्र बनाना सीखो
नृत्य सीखों, घूंघरुओं को बजाओ
या सीखो कोई ऐसी कला
जो नहीं बँधी हो भाषा के दायरों में
यह एक अनुभूति है
जो भाषाओं की दुनिया में
भाषाओं से परे
भाषाओं से कही उपर है
उन अनुभूतियों में हम सब एक है
एकांत है
ये एक बड़ा सा पौधा था जो Airbnb के हमारे घर के कई और पौधों में से एक था। हालांकि हमे इन पौधों की देखभाल के लिये कोई हिदायत नहीं दी गयी थी लेकिन हम सबको पता था कि उन्हे देखभाल की जरुरत है । इसी के चलते मैंने सभी पौधों में थोड़ा थोड़ा पानी डाला क्योकि इनडोर प्लांटस् को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती और एक बार डाला पानी पंद्रह दिन तक चल जाता है। मैं पौधों को पानी देकर बेफिक्र हो गयी। दूसरी तरफ यही बात घर के अन्य दो सदस्यों ने भी सोची और देखभाल के चलते सभी पौधों में अलग अलग समय पर पानी दे दिया। इनडोर प्लांटस् को तीन बार पानी मिल गया जो उनकी जरुरत से कही अधिक था लेकिन यह बात हमे तुरंत पता न लगी, हम तीन लोग तो खुश थे पौधों को पानी देकर। दो तीन दिन बाद हमने नोटिस किया कि बड़े वाले पौधे के सभी पत्ते नीचे की ओर लटक गये, हम सभी उदास हो गये और तब पता लगा कि हम तीन लोगों ने बिना एक दूसरे को बताये पौधों में पानी दे दिया। हमे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे, बस सख्त हिदायत दी कि अब पानी बिल्कुल नहीं देना है। खिलखिलाते...
टिप्पणियाँ
जय मां हाटेशवरी.......
आप को बताते हुए हर्ष हो रहा है......
आप की इस रचना का लिंक भी......
01/09/2019 रविवार को......
पांच लिंकों का आनंद ब्लौग पर.....
शामिल किया गया है.....
आप भी इस हलचल में......
सादर आमंत्रित है......
अधिक जानकारी के लिये ब्लौग का लिंक:
http s://www.halchalwith5links.blogspot.com
धन्यवाद
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (01-09-2019) को " जी डी पी और पी पी पी में कितने पी बस गिने " (चर्चा अंक- 3445) पर भी होगी।
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
….
अनीता सैनी
सीखना ही है तो मानवता की भाषा सीखो ...
सच आज इसी की तो भारी कमी है दुनिया में
बहुत सुन्दर