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जनता कर्फ्यू

जनता कर्फ़्यू
जनता का,जनता के लिये
एक संकल्प संक्रमण के खिलाफ
परीक्षा खूद के संयम की 
सब साथ आये, सहयोग दे
आभार की करतल ध्वनी से 
गुंजायमान आकाश करे
थाली बजाये शाम पाँच बजे
पूरी सामुहिकता से
सिर्फ एक दिन नहीं
दो हफ्तों तक ध्यान रखे
बेवजह बाहर न निकले
अंदर रहकर
खंगाले खूद को भीतर से 

टिप्पणियाँ

Nitish Tiwary ने कहा…
इस संकट की घड़ी में हम सब को सहयोग करने की जरूरत है।
जनता के हित में यह जरूरी है।
Rohitas Ghorela ने कहा…
खुद का मनन करने में इसका फ़ायदा उठाया जाए।
अच्छी रचना।
नई रचना सर्वोपरि?
आत्ममुग्धा ने कहा…
जी...सही कहा आपने
आत्ममुग्धा ने कहा…
सभी के साथ से ही यह जनहित सफल हो पायेगा

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पिता और चिनार

पिता चिनार के पेड़ की तरह होते है, विशाल....निर्भीक....अडिग समय के साथ ढलते हैं , बदलते हैं , गिरते हैं  पुनः उठ उठकर जीना सिखाते हैं , न जाने, ख़ुद कितने पतझड़ देखते हैं फिर भी बसंत गोद में गिरा जाते हैं, बताते हैं ,कि पतझड़ को आना होता है सब पत्तों को गिर जाना होता है, सूखा पत्ता गिरेगा ,तभी तो नया पत्ता खिलेगा, समय की गति को तुम मान देना, लेकिन जब बसंत आये  तो उसमे भी मत रम जाना क्योकि बसंत भी हमेशा न रहेगा बस यूँ ही  पतझड़ और बसंत को जीते हुए, हम सब को सीख देते हुए अडिग रहते हैं हमेशा  चिनार और पिता

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