जीवन की अनमोल निधि है रिश्तें .कुछ बनाये जाते है तो कुछ अपने आप बन जाते है .कुछ जन्म से हमारे साथ जुड़े होते है तो कुछ रिश्तों का दामन हम विवाहोपरांत थामते है .कुछ रिश्ते दिलों में बसे होते है तो कुछ दिमाक पर हावी होते है .कुछ होते है ऐसे भी रिश्ते जो वक़्त के साथ धुंधले हो जाते है, जबकि कुछेक वक़्त के साथ पनपते है .कुछ रिश्तों को फलने-फूलने के लिए स्नेह की खाद और आशीर्वाद की छाँव की जरुरत होती है ,जबकि कुछ रिश्ते संघर्षों और जज्बातों की कड़ी धुप में भी मुस्कुराते है .कुछ होते है ऐसे दृढ रिश्ते, जिनका कोई नाम नहीं होता, कोई परिभाषा नहीं होती,जबकि कुछ रिश्ते होते है सिर्फ नाम के ,संबोधन के ,जिनमे कोई अहसास नहीं होता .कुछ रिश्ते होते रक्त के तो कुछ होते अहसासों के जज्बातों के .कुछ रिश्तों के साथ जिंदगी का सफ़र होता सुहाना ,तो कुछ रिश्ते बोझ ढोते जिंदगी का .कोई रिश्ता हर पल तिल-तिल मरता तो कोई रिश्ता मर कर भी अमर हो उठता .किसी ने सच कहा है .."अगर देखना हो कि आप कितने अमीर हो तो अपनी दौलत को मत गिनना , अपनी आँख से आंसू गिरना ,और देखना कि कितने हाथ इसे समेटने के लिए आगे बढ़ते है ...
अपने मन के उतार चढ़ाव का हर लेखा मैं यहां लिखती हूँ। जो अनुभव करती हूँ वो शब्दों में पिरो देती हूँ । किसी खास मकसद से नहीं लिखती ....जब भीतर कुछ झकझोरता है तो शब्द बाहर आते है....इसीलिए इसे मन का एक कोना कहती हूँ क्योकि ये महज शब्द नहीं खालिस भाव है