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HT NO TV DAY

आजकल कुछ खास दिनों को मनाने का प्रचलन बहुत जोरो पर हैं, जैसे hug day,rose day,kiss day,chocolate day,mothers day,fathers day,daughters day,smile day और भी ना जाने क्या क्या ।लेकिन इन सब के बीच "हिन्दुस्तान टाइम्स" एक नई पहल लेकर आया है और पिछले दो सालों से इस मुहिम को सफल भी बना रहा है । HT NO TV DAY एक सार्थक प्रयास ।           पिछले दो सालों में HT ने ना केवल यह शुभ कार्य प्रारम्भ किया बल्कि इसे सफल बनाने के लिए भी भरसक प्रयत्न किये और निसन्देह: वह इसके लिये बधाई के पात्र है ।            इस "बुद्धु बक्से" ने हमारी भावी पीढ़ी को पूरी तरह से अपने चक्रव्यूह में फंसा लिया है ।गृहिणीयों की रचनात्मकता और कुशलता भी इसको भेंट चढ़ गई । जो समय परिवार के नाम होता है,वो समय भी ये डकार गया । हमे सब पता है फिर भी........... ।             मैं यहाँ TV के गुण और दोष नहीं गिनाने वाली हुँ ,वो तो हम सब को पता है ।मेरी इस post का पूरा श्रेय है HT की टीम को , जिनके जज्बे ने हम सबको प्रेरित किया tv बंद करने को ।मैं प...

पश्चिम बंगाल और सिक्कीम की मेरी यात्रा

.......बस के हिचकोलों के साथ अपनी सांसों के उतार-चढ़ाव को संयत करते हुए हम आखिरकार अपने होटल जगजीत तक पंहुच ही गये । ठंड हमे कपकपां रही थी,हम जल्दी से अपने अपने कमरों में जाना चाहते थे । बच्चों का कमरा हमारे कमरे से लगकर ही था । बच्चों को मौसम का विकराल  रूप बिल्कूल अच्छा नहीं लग रहा था ।            थोड़ी ही देर में हम सब रात के खाने के लिए dining hall में गये जो कि ऊपर की मंजिल पर था,वहाँ हम सभी साथी यात्रियों का आपस में परिचय हुआ । मुझे पता चला कि साथ वाली दोनो आंटी आपस में समधन हैं और बड़ी वाली आंटी जो कि ७५ वर्ष की है ,रिटायर्ड डाॅक्टर हैं,दुसरी आंटी म्युजिक टीचर है । मेरे बच्चों को दोनो आंटीज् बड़ी मस्त (उनकी भाषा में) लगी ।खाना बहुत लजीज़ था।हमे दुसरे दिन के कार्यक्रम के बारे में बताया गया । २२अप्रेल -                    सुबह का नाश्ता करने के बाद हम लोग माॅनेस्टरी देखने गये,जो कुछ ही कदमों की दूरी पर थी ।हमारे होटल से माॅनेस्टरी पास ही दिख रही थी ।हम आठ के समुह में थे और चढा़ई वाले रास्ते...

पश्चिम बंगाल और सिक्कीम की मेरी यात्रा

मैं बहुत उत्साहित थी,अपनी इस यात्रा को लेकर । पूरे दो सालों के बाद , फुर्सत के कुछ पल जूटा पाई थी मैं । हालांकि लेह की यादें अभी भी मेरे जेहन में ताजा थी,लेकिन एक नया पड़ाव मुझे अपनी ओर खींच रहा था ।        २१अप्रेल की हमारी "बुकिंग" लगभग तीन महीनों पहले हो चुकी थी। हमारी तैयारियाँ भी काफी समय पहले शुरु हो चुकी थी.....और फिर मुम्बई की चिपचिपाहट वाली गरमी भी जैसे हमे किसी पर्वतीय स्थल पर धकेल रही थी......। २१अप्रेल :- हमारा "ट्यूर" बागडोगरा से प्रारम्भ हुआ। मुम्बई से बागडोगरा की हमारी यात्रा दो चरणों में पूरी हुई.....। सुबह करीब साढ़े तीन बजे हम घर से निकले.... हवाईअड्डे की औपचारिकताओं को निपटा कर छः बजे हमने उड़ान भरी,आठ बजे तक हम दिल्ली पहुंचे और दुसरी हवाईयात्रा का इंतजार करने लगे,जो कि ११ बजे की थी । दिल्ली हवाईअड्डे की खुबसूरती निहारने में कब ११ बज गये पता ही नहीं चला ।अब हम हमारे गंत्व्य स्थल की यात्रा की ओर अग्रसर थे.....और १२:३० पर हम बागडोगरा हवाईअड्डे पर खड़े थे ।        हमारा "ट्यूर मैनेजर" हमारे स्वागत के लिए पहले से ही वहा...

सूरज और मैं

पूरे दिन का थका-मांदा ढलता सा सूरज कल रात; मेरे आंगन के एक कोने में आ छुपा रात के साये से घबराया सिमट रहा था मेरे ही आँचल में मैंने कहा,चलो बतियाए थोड़ा देख के स्नेह मेरा उसने भी मौन तोड़ा उसे सहमा सा देखा तो खुद पे हुआ गुमां और कह बैठी सूरज से कि तुझमे हैं ज्वाला इतनी तो लौ मुझमे भी कम नहीं तेरे जितना तेज ना सही लेकिन; मैं भी किसी से कम नहीं जिस सृष्टी को देते हो तुम उजाला सोचो जरा कौन है उसे जन्म देने वाला तुम तो रात के सायों में खो जाते हो सितारों के आगोश में सो जाते हो लेकिन मैं........ खुद ही सितारों की चूनर बन जाती हूँ और तुम जैसों को अपने आँचल मे सहलाती हूँ मेरी बातें सुन,सूरज मुस्कुराया और बोला हँस कर तु तो है वो नन्हा सा दिया जिसकी लौ पे सबने अभिमान किया मेरी ज्वाला किसी से सही ना जाए लेकिन तेरी लौ सबको पास बुलाए तुने पूछा........क्या हूँ मैं ? मैं तो बस तेरे माथे पे सजा सिंगार हूँ......... ऐसा कह चला गया वो नन्हा सा सहमा सा सूरज आसमां को सिंदूरी करने अपनी किरणों को मेरे आँगन मे छोड़.......... Proud to be a woman

मैं जीना चाहती हूँ

जीने दो मुझे इंसान की तरह  क्योकि  कहते हो अन्नपुर्णा  और नोचते हो बोटी-बोटी  दुर्गा कहकर सर नमाते हो  और दुसरे ही पल  एक राह चलती दुर्गा को  पावँ तले रौंदते हो  महान तो बताते हो  लेकिन इंसान बनकर जीने नहीं देते हो  तुम्हारे हौसलें है बुलंद  क्योकि सदियों से तुमने लूटा है हमारा तन मन  कभी द्रौपदी को छला  तो कभी सीता की ली अग्निपरीक्षा  राधा को तो तुमने कही का ना छोड़ा  जीवन भर प्यासी प्रेयसी बनाकर  दिल उसका तोडा  लेकिन ; फिर से चली चाल,बहलाया ,फुसलाया  कृष्ण से पहले राधा का नाम लगाया  लेकिन सोचा है कभी  अरे! सोलह हजार रानियों में  एक भी राधा का नाम क्यों ना आया  फिर भी तुम देव हो  क्योकि तुम एक मर्द हो  यही तो होता आया है सदियों से  छला गया हमेशा छल-प्रपंच से  ना जाने क्यों  तुम्हारा मन तुम्हे नहीं धिक्कारता  करते हो ऐसे कुकर्म  कि माँ के दूध को भी आती है तुम पर शर्म  नारी हूँ म...

चाँद चौथ का

सहेज के रखी , अपनी ब्याह की चुनडी  आज फिर से मैं निकाल लाई  सात फेरों के सातों वचन  याद करने की रुत फिर से आई  तेरे हाथों से सजे मांग मेरी  एक बार फिर , फेरों की वह बात याद आई  ललाट पर कुमकुम , मांग में तारे  जैसे आँगन में मेरे  झूमते हो चाँद-सितारे  मेहंदी से रची हथेली, चूड़ियों से भरी कलाई  माथे पे सजा सिन्दूर , गालों  पे आई ललाई  कर-कर के श्रृंगार मैं मुसकाई  देख के दर्पण , खुद से ही शरमाई  यह जादू है आज के दिन का  सज-सज के सजना के लिए  एक प्रोढ़ा भी दुल्हन सी जगमगाई  यौवना हो या प्रोढ़ा रूप तो आज सबपे है टुटा  करके श्रृंगार देखेगे चाँद से झरता प्यार  यह जादू है आज के दिन का  बिखेरेगा प्यार .....देगा दीदार  झूम के निकलेगा चाँद .......हाँ .................चाँद करवा चौथ का ! करवा चौथ की हार्दिक बधाइयाँ    

सूपर मोम

सूपर मोम.......यह शब्द पिछले कुछ वर्षों से महिलाओं से जुड़े शब्दों में प्रमुख रूप से उभरकर आया शब्द है .आखिर कौन है सुपर मोम ?.......यह माँ का वो आधुनिक रूप है जिसकी कल्पना हमारी दादी-नानी ने तो कदापि नहीं की थी .इस सुपर मोम की जिंदगी सुबह पांच बजे से शुरू होकर रात के ग्यारह बजे भी थमने का नाम नहीं लेती .यह सुपर मोम आधुनिक समाज की वो नारी है जो हर जगह अपनी सक्रीय भूमिका निभाती है , अब उसका कार्यक्षेत्र सिर्फ रसोईघर ही नहीं रहा बल्कि हर क्षेत्र में वह अपनी दमदार दावेदारी रखती है .वह घर की धूरी है , ऑफिस में powerful कॉरपोरेट women है , सिर्फ पति और बच्चों को ही समय नहीं देती , खुद के लिए भी समय निकालती है , पार्लर और स्पा में जाती है ,किट्टी पार्टी एन्जॉय करती है , डिस्को में थिरकती है , रसोईघर में लैपटॉप पर अंगुलियाँ चलाते हुए मिनटों में microwave में खाना बना लेती है बिना धुएँ , चूल्हे और चौके के और भी ना जाने ऐसी कितनी अनगिनत चीजे है जो ये सुपर मोम पलक झपकते ही कर लेती है और सबसे बड़ी बात कि इस सुपर मोम से सब खुश है , पति इसकी कोई बात नहीं काटता, बच्चें mother's day पर कार्...