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चाँद चौथ का

सहेज के रखी , अपनी ब्याह की चुनडी 
आज फिर से मैं निकाल लाई 
सात फेरों के सातों वचन 
याद करने की रुत फिर से आई 
तेरे हाथों से सजे मांग मेरी 
एक बार फिर , फेरों की वह बात याद आई 
ललाट पर कुमकुम , मांग में तारे 
जैसे आँगन में मेरे 
झूमते हो चाँद-सितारे 
मेहंदी से रची हथेली, चूड़ियों से भरी कलाई 
माथे पे सजा सिन्दूर , गालों  पे आई ललाई 
कर-कर के श्रृंगार मैं मुसकाई 
देख के दर्पण , खुद से ही शरमाई 
यह जादू है आज के दिन का 
सज-सज के सजना के लिए 
एक प्रोढ़ा भी दुल्हन सी जगमगाई 
यौवना हो या प्रोढ़ा
रूप तो आज सबपे है टुटा 
करके श्रृंगार देखेगे चाँद से झरता प्यार 
यह जादू है आज के दिन का 
बिखेरेगा प्यार .....देगा दीदार 
झूम के निकलेगा चाँद .......हाँ .................चाँद करवा चौथ का !
करवा चौथ की हार्दिक बधाइयाँ 
  

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महिलाओं के जीवन के रंग हैं इन उत्सवों में ....आपको भी शुभकामनायें

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पिता चिनार के पेड़ की तरह होते है, विशाल....निर्भीक....अडिग समय के साथ ढलते हैं , बदलते हैं , गिरते हैं  पुनः उठ उठकर जीना सिखाते हैं , न जाने, ख़ुद कितने पतझड़ देखते हैं फिर भी बसंत गोद में गिरा जाते हैं, बताते हैं ,कि पतझड़ को आना होता है सब पत्तों को गिर जाना होता है, सूखा पत्ता गिरेगा ,तभी तो नया पत्ता खिलेगा, समय की गति को तुम मान देना, लेकिन जब बसंत आये  तो उसमे भी मत रम जाना क्योकि बसंत भी हमेशा न रहेगा बस यूँ ही  पतझड़ और बसंत को जीते हुए, हम सब को सीख देते हुए अडिग रहते हैं हमेशा  चिनार और पिता

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