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विदा

मैं कुछ देर तक पुकारूँगी
फिर चली जाऊँगी
चाँद के पार
या
शामिल हो जाऊँगी 
उन सितारों में कही
जहाँ मेरे सुकून की छाँव है 

टिप्पणियाँ

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा रविवार (१९-०१ -२०२०) को "लोकगीत" (चर्चा अंक -३५८५) पर भी होगी।

चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
….
-अनीता सैनी
Onkar ने कहा…
सुन्दर प्रस्तुति
~Sudha Singh Aprajita ~ ने कहा…
सुंदर रचना सखी 🙏 🙏
आत्ममुग्धा ने कहा…
दिल से आभार आपका 🙏
Jyoti khare ने कहा…
बहुत सुंदर सृजन