सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

कद्दू

एक त्यौहार यहाँ आने वाला है, जिससे अब हम भारतीय भी अनजान नही है,नाम है हैलोवीन। 
पूरे अमेरिका में इसकी तैयारियां चालू है । यह पतझड़ का भी समय है, जो कि बेहद खूबसूरत समय है , जब हरे पत्ते लाल नारंगी होकर हवा के झोकों के साथ गिरने लगते है ।
    हैलोवीन और पतझड़ के साथ एक और नारंगी रंग की चीज मैंने हर जगह देखी , वो है कद्दू यानि की पम्पकिन।
अब सोचने वाली बात है कि आखिर ऐसा क्या है जो इस साधारण नारंगी रंग के फल को अमेरिका में इतना लोकप्रिय बनाता है, कि उनके दो त्यौहार - हैलोवीन और थैंक्सगिविंग - इसके बिना लगभग अधूरे हैं? 
वास्तव में यहाँ कद्दू की इतनी प्रचुरता है जो मैंने स्वयं अपनी आँखों से देखी है । कद्दू यहाँ की मुख्यधारा का एक हिस्सा है, यह रोजमर्रा के भोजन में तो इस्तेमाल होता ही है बल्कि इसे सजावट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है, हैलोवीन के दौरान यह सभी की पसंदीदा चीज़ है। 

अपनी नारंगी चमक के साथ, यह प्यारा कद्दू पतझड़ की सजावट में चार चाँद लगा देता है। 
इन दिनों हर घर के एंटरेंस पर कद्दू सजा है जो हमारे भारतीय कद्दूओं की साइज से कही ज्यादा बड़ा होता है । यहाँ पर कद्दुओं को खोखला कर उन पर कार्विंग की जाती है और उसके अंदर कैंडल जलायी जाती है जिसे जैक ओ 'लैंटर्न के नाम से जाना जाता है, इसके पीछे एक लोकल कहानी है । एक किवदंती यह भी है कि कद्दू बुरी आत्माओं को दूर भगाते है इसलिये हैलोवीन में हर घर के प्रवेशद्वार पर आपको कद्दू मिलेगा।
    मैं जब से यहाँ आयी हूँ तब से मुझे हर जगह ये कद्दू दिख रहे है । हाट हो या Deli shop (यहाँ जनरल स्टोर या किराने की दुकान को इसी नाम से जाता है) या फिर बड़े स्टोर हो , हर जगह इनकी प्रचुरता है। मुझे दिलचस्पी हुई कि इतने सारे कद्दू का ये लोग करते क्या है ? जब थोड़ा और अधिक जाना तो पता लगा कि इससे मिठाई बनती है, जैम बनता है, डिप बनती है और कॉफी बनती है जिसे साल भर काम में लिया जाता है। 

    कद्दू को इतना अधिक देख लिया तो मेरे क्रोशिया के धागें भी कद्दू में ढल गये और एक छोटा सा कद्दू मैंने भी बना लिया इस देश के सबसे पसंदीदा त्यौहार की याद में। 

#pumpkin #crochetart #travelling #usa 

टिप्पणियाँ

Anita ने कहा…
वाह ! रोचक जानकारी और अद्भुत कारीगरी

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

पिता और चिनार

पिता चिनार के पेड़ की तरह होते है, विशाल....निर्भीक....अडिग समय के साथ ढलते हैं , बदलते हैं , गिरते हैं  पुनः उठ उठकर जीना सिखाते हैं , न जाने, ख़ुद कितने पतझड़ देखते हैं फिर भी बसंत गोद में गिरा जाते हैं, बताते हैं ,कि पतझड़ को आना होता है सब पत्तों को गिर जाना होता है, सूखा पत्ता गिरेगा ,तभी तो नया पत्ता खिलेगा, समय की गति को तुम मान देना, लेकिन जब बसंत आये  तो उसमे भी मत रम जाना क्योकि बसंत भी हमेशा न रहेगा बस यूँ ही  पतझड़ और बसंत को जीते हुए, हम सब को सीख देते हुए अडिग रहते हैं हमेशा  चिनार और पिता

गर्भगृह

मुझे अंधेरों से डर नहीं लगता मुझे सन्नाटों का भी खौफ़ नहीं उष्णता मुझे तरबतर नहीं करती आपदाओं से मैं घबराती नहीं काल कोठरी सी एक छोटी जगह जहाँ रोशनी की महीन किरण तक नहीं मुझे पर्याप्त है क्योकि मैं उसे समझ लेती हूँ माँ का गर्भगृह जहाँ कुछ समय मुझे रहना है जीवन पाकर बाहर आना है ईश्वर अभी भी रच रहा है मुझे उसकी रचना पर सवाल नहीं संदेह नहीं

खरे लोग

लगभग साल डेढ़ साल पहले की बात है, मैंने इंस्टा पर एक नया अकाउंट बनाया था । आत्मविश्वासी महिलाओं , क्रियेटिव ज्वैलरी और हैंडलूम साड़ीयों को यहाँ मैं फॉलो किया करती थी। रोज कुछ नया तलाशती रहती थी। ऐसे में एक दिन स्क्रॉल करते हुए नजरे ठहर गयी.....चाँदी की ज्वैलरी का एक बड़ा पेज । खुबसूरत शब्दों में ढ़ली ज्वैलरी और ज्वैलरी भी ऐसी कि हर पीस मन को भा जाये। मैंने तीन पीस सलेक्ट कर मंगाये।  उनके आने पर मैंने पिक क्लिक कर पोस्ट डाली....पिक में मेरे हाथ का टेटू था। ज्वैलरी के साथ टेटू की भी तारीफ हुई । फिर बात आयी गयी हुई ।              एक दो बार पेज की ऑनर दिव्या से थोड़ी बहुत बात हुई । एक उच्च स्तरीय व्यक्तित्व और एक माँ के रुप में वो मुझे बहुत पसंद आयी। पता नहीं क्यो, बच्चों की परवरिश के तौर तरीकों को देखते हुए मैं अक्सर उन माँओं से प्रभावित होती हूँ तो मदरहुड एंजोय करती है ....दिव्या उन्ही चुनिंदा लोगो में से एक है । खैर....हमारी बात थोड़ी और हुई, मेरी कला और शब्दों ने कही न कही दिव्या को छूआ। दिव्या को मेरा पेननेम "आत्ममुग्धा" बहुत पसंद आया और उसने कहा कि मै...