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साड़ी

आज इंटरनेशनल साड़ी डे है । एक वक्त था जब मैं हर रोज साड़ी पहनती थी, साड़ी पहनना आदतन था। अब भले ये आदत थोड़ी पीछे छूट गयी है पर साड़ी से मोह हर रोज बढ़ता जा रहा। साड़ी की मेरी समझ अब पहले से कही अधिक है।
            जैसा कि सब कहते है कि साड़ी महज एक कपड़ा नहीं है वो इमोशन है , मैं इस बात से पूरा सरोकार रखती हूँ । साड़ी सच में आपके भाव है, आपकी अभिव्यक्ति है , आपके व्यक्तित्व का आइना है।
   हम सबकी अपनी अपनी पसंद होती है और कुछ चुनिंदा रंगों की साड़िया स्वत: ही हमारी आलमारी में जगह बना लेती है।कुछ साड़ियों दिल के बेहद करीब होती है , कुछ में कहानियां बुनी होती है, कुछ के किस्से गहरे होते है, कुछ हथियायी हुई रहती है, कुछ उपहारों की पन्नी में लिपटी होती है, कुछ कई महीनों की प्लानिंग के बाद आलमारी में उपस्थित होती है तो कुछ दो मिनिट में दिल जीत लेती है ....मेरी हर साड़ी कुछ इन्ही बातों को बयां करती है लेकिन एक काॅमन बात है हर साड़ी में, कोई भी साड़ी कटू याद नहीं देती और यही बात साड़ी को खास बनाती है। आप अपनी आलमारी खोलकर देखिये , साड़ियां मीठी बातों से ही बुनी होती है।
    साड़ियां माँ की याद दिलाती है,माँ के बिना भी माँ का अहसास करा जाती है। दादी की बनायी तह में रिश्तों को नजाकत से सहेजना सिखाती है। मेरी कितनी ही साड़ियों में फाॅल मेरी दादी के हाथों से लगा है , आज तक वो तुरपन नहीं उधड़ी है।
       साड़ियों की सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये जादुगरी करती है ....आप कितनी भी साड़ियां खरीद ले लेकिन इनके प्रति लोभ कम नहीं होता । मेरे हर न्यू ईयर रिज्योलुशन में ये जरूर होता है कि इस साल साड़ी नहीं खरीदूंगी लेकिन साड़ी की जादूगरी सिर चढ़कर बोलती है और सब भुला देती है। मुझे लगता है कि साड़ीयों की खरिदारी हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।
     अगर आपकी आलमारी साड़ियों से भरी है और जरुरत न होने पर भी गर एक साड़ी आपने खरीद ली तो गिल्ट मत लाईये मन में.....इसकी माफी हर दरबार में है क्योकि साड़ी इमोशन है।
    तो बिल्कुल इतरा कर पहनिये अपनी साड़ियां , ना तो ये आपकी हाइट वजन आपसे पूछती है, ना आपका साईज मैटर करता है.....ये बस आपको पुर्ण व्यक्तित्व बनाना जानती है, ये आपको सजाना जानती है।
हैप्पी साड़ी डे !
       

टिप्पणियाँ

Sweta sinha ने कहा…
बहुत सुंदर लेख:))
सादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार २२ दिसम्बर २०२३ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
शुभा ने कहा…
वाह! बहुत खूब।
Alaknanda Singh ने कहा…
साड़ीयों की खरिदारी हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है....मन की बात कर दी आपने ...वाह
आत्ममुग्धा ने कहा…
जी, यही सच है ना 😀

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