गुरुवार, 5 जुलाई 2012

कोरा कागज

कुछ खास नहीं
आज लिखने को 
तो सोचा 
चलो समय के कागज पर 
कलम को अपनेआप ही चलने दूं 
अपनी ही लेखनी को एक नया आयाम दूँ 
दिल और दिमाग  पर छाये शब्दों को 
अस्त-व्यस्त ही सही 
लेकिन बहने दूं 
शायद कविता ना बन पाए 
शायद अक्षर मोती से ना  सज पाए 
लेकिन 
चलने दूं 
लेखनी को 
अपनी ही रफ़्तार में 
लिखने दूं 
कुछ शब्द अपनी ही जिंदगी की किताब के 
लेकिन ये क्या ?
कुछ कडवे पर सच्चे शब्द 
उड़ गए वक़्त की आंधी में , किसी पाबंदी में 
निकले थे जो दिमाग  के रस्ते से 
और कुछ भावुक शब्द 
पिघल गए अपनी ही गरमी से 
धुल गए आंसुओं से 
जो निकले थे सीधे दिल से 
और................................
मेरी लेखनी को आयाम नहीं 
सिर्फ विराम मिला 
और मेरा कागज जो कोरा था 
कोरा ही रह गया 

24 टिप्‍पणियां:

  1. शनिवार 07/07/2012 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. आपके सुझावों का स्वागत है . धन्यवाद!

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  2. बड़ा मुश्किल है भावों को शब्द दे पाना .... अक्सर ऐसा भी होता है...

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  3. प्रभावशाली लेखनी कई बार रुक जाती है ...

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  4. मेरी लेखनी को आयाम नहीं
    सिर्फ विराम मिला
    और मेरा कागज जो कोरा था
    कोरा ही रह गया

    bahut sundar abhivyakti ...!!
    shubhkamanaye

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    1. aapki shubhkamanaye sar-aankho par anupamaji....aage bhi mere panno par aapki upasthiti chahungi ....dhanyawaad

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  5. आपका ब्लॉग पसंद आया....इस उम्मीद में की आगे भी ऐसे ही रचनाये पड़ने को मिलेंगी......आपको फॉलो कर रहा हूँ |

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  6. कभी फुर्सत मिले तो नाचीज़ की दहलीज़ पर भी आयें-

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  7. हमारी टिप्पणी कहाँ गयी..........

    चलिए फिर कहती हूँ....
    सुन्दर भाव ..सुन्दर रचना...
    अनु

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  8. Jeevan ki kitab se agar kaduve shabd nikal saken ... Bhavnayen bah saken ... Aseem shanti ka korapan mil jaye to nirvana ki sthiti aate der nahi .... Gahre bhav liye hai aapki rachna ...

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  9. बहुत अच्छी प्रस्तुति संगीता जी लेखन एक अनवरत शोध है अन्वेषण है लिखना एक अन्वेषी की तरह है प्रोब है .कृपया दिमाक की जगह दिमाग कर लें.सादर नमन .

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    1. yahan aane ke liye aabhaar......galati par dhyaan dilaane ke liye dhanywaad

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