रविवार, 11 मार्च 2012

माँ हूँ तुम्हारी

एक कविता मेरे बेटे के नाम उसके जन्मदिन पर 
           चाहती हूँ मैं 
कि मेरी खुशियाँ तुम्हे लग जाये 
और , तुम्हारे दुखों को मैं अपना लू 
आँख में आये आंसू तुम्हारे 
तो अपनी पलकों में सहेज लू 
कही मिले ना आसरा तुझे 
तो अपने आँचल में समेट लू 
हंसो जब तुम 
तो तुम्हारी मुस्कुराहट को गले लगा लू 
जब ख़ुशी से चमके तुम्हारी आँखे 
तो उसे अपनी कामयाबी बना लू 
गलत राह भी ग़र चलो तुम 
तो वो राह भी तुम्हे चुनने ना दूँ 
क्योकि ;
माँ हूँ तुम्हारी 
चाहती हूँ तुम्हे परिपूर्ण देखना 

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