बुधवार, 14 दिसंबर 2016

सहजता

                             
                              'सहज' एक संस्कृत शब्द है,जिसका मतलब होता है 'प्राकृतिक' या फिर जो बिना प्रयास के किया जाये......तात्पर्य है कि जो अपने आप व्यक्त हो जाये वह सहजता है। इसे हम स्वाभाविकता भी कह सकते है....... स्व के भाव के अनुकूल जो, वो स्वाभाविक अर्थात सहज। सहजता एक नैसर्गिक गुण है जिसे हम मन के किसी कोने में दबा देते है........ कभी अधिक परिपक्व दिखने की चाह में तो कभी कुछ समझ ना पाने की वजह से........ और तब सब नाटकीय हो जाता है और बस, वही से जद्दोजहद शुरू हो जाती है खुद से खुद की।समझदार दिखने का लोभ हमे असहज बना देता है और चालाकियाँ स्वत: ही दस्तक देने लगती है।
                 कभी देखा है किसी फुल को खिलने के लिये प्रयास करते हुए,वो सहज ही खिल जाता है,बिल्कुल इसी तरह नदी सहज ही बहती रहती है बिना किसी प्रयास,सुरज हर रोज सहज ही उदय अस्त होता रहता है,और तो और हमारे जीवन का आधार हमारी सांसे भी तो सहज ही आती जाती रहती है बिल्कुल सहजता से,तो फिर हम क्यो अपने आप को असहज बनाये जा रहे है आगे बढने की होड़ में............ यकीन मानीये,सहज रहकर प्रयास करे आप सबसे आगे खड़े होंगे।
            अगर हम सहज होना सीख ले तो समझ ले कि जीवन जीने की कला आ गयी। सहजता की एकमात्र ईकाई सच होती है और इस सच्चाई की एक अलग ही लौ होती है जो हमारे चेहरे को एक आभा देती है और उसकी उर्जा सामने वाले पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है। अगर हम बिना लाभ हानि परखे निडरता से सच बोलते है तो हम सहज रहते है,हमे किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं रहती,वही दूसरी ओर सहज रहते हुए हम कठिन से कठिन परिस्थिति को भी आत्मसात कर जाते है।देखा जाये तो जीवन का सार ही सहज गति से बहने में है। सहजता को पाना जीवन की
कठिनाईयों पर पार पाना है।
             लेकिन ध्यान रखे हरेक की सहजता अलग अलग है,जरूरी नही कि जो आपके लिये सहज है वो सबके लिये भी हो....... आपकी सहजता किसी की असहजता भी हो सकती है इसलिये सभी की निजता का सम्मान करे और सहज बने रहे। माना कि गहरी अर्थपूर्ण बातें आपके गुढ़ ज्ञान को दर्शाती है लेकिन जरूरी नहीं कि सामने वाला आपकी बातो से सहज हो सके,भले ही आप अपनी तरफ से कितने भी सहज हो।बातो को पेचिदा बनाना,घुमाफिराकर कहना और बड़ा करके कहना अंहकार का परिचायक है सहजता का नही।ध्यान रखे जितने सहज आप है सामने वाले को भी उतना ही सहज बनाये रखना ही आपकी कारीगरी है।

0. सहजता से मतलब लापरवाही से नहीं है।
0. अधिक सजगता भी सहज होना नहीं है।
0. सरल रहिये,सरलता मन की अवस्था है।
0. जितना अधिक हम स्वीकार करेगे ,उतने अधिक हम सहज होते जायेंगे।
0 जो मौलिक और सादगी भरा हो वही मुक्त होकर जीवन जी सकता है।
0. सहजता का मतलब ये कतई नहीं कि आप हर किसी की बात पर स्वीकृति की मोहर लगाते जाये,वो आपके व्यक्तित्व का हनन होगा
0. अपनी गरिमा कभी ना खोये।
0. सहजता का मतलब दब्बू भी नहीं है,सहज के साथ मुखर रहे।
0. किसी भी गलत बात को सहजता से नकार दे
0. सहज रहेंगे तो संवाद बना रहेगा और विवादों से बचे रहेंगे।
0. ईगो को कभी भी अपने जीवन शैली की नींव ना बनाये।
0. गलत है तो सहजता से स्वीकार करना सीखे।
0. त्वरित प्रतिक्रिया आपको दुविधा में डाल सकती है,अत: इससे बचे।
0. सकारात्मक और मजबूत बने रहे,कड़वी बातो को जज्ब करने का हौसला रखे,सहजता आपको तेजोमयी बना देगी।

   जो कछु आवै सहज में सोई मीठा जान |
     कड़वा लगै नीमसा, जामें ऐचातान ||
   सहज सहज सब कोई कहै, सहज न चीन्हैं कोय |
     पाँचों राखै पारतों, सहज कहावै साय ||

 संगीता जाँगिड़

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