मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

नया साल

जीवन का एक और वर्ष ले रहा है विदा
अब कहना है निराशा को अलविदा
कुछ यादें छलकी सी
कुछ यादें धुमिल सी
कुछ खुशियों भरी ओस की बुंदों सी
कल से बन जायेगी धरोहर
बीते हुए साल की
नये सपनों के संग
शुरुआत होगी नये साल की
कल का सुरज
मिटा देगा कोहरा
आसां हो जायेगी मुश्किल राह की
रात गयी सो बात गयी
जगी है ललक अब कुछ पाने की
हम बढ़े,सब बढ़े और बड़ी हो सोच सबकी
ना कुछ तेरा ना मेरा
ये जीवन तो है नियामत ख़ुदा की
बस....
खुश रहे सब
चाह बढ़ जाये जीने की

रविवार, 15 दिसंबर 2013

हवा

मेरी चुप्पी को घमंड
मेरे शब्दों को प्रचंड
बतियाते नयनों को उदंड
और
मधुरता को मनगढ़ंत
समझते है लोग
लेकिन दोष लोगों का नहीं
कमबख़्त .....
हमारी राह से गुजरने वाली हवा की
फ़ितरत ही कुछ ऐसी है ।