मंगलवार, 6 मार्च 2012

आज होली है

आज होली है
सब रंगे एक ही रंग में
नकाब पे चढ़ गया एक और नकाब
पहले ही ना पहचाने जाते थे
अब तो पहचानना और मुश्किल हो गया
नकाबपोशों की इस दुनियां में
चलो चलते है
चुराते है कुछ रंग खुशियों के
और
सजाते है जिंदगी का इन्द्रधनुष
जला देते है होली
उन कडवी यादों की
जो गाती है दास्ताँ बेरंग से ज़ज्बातों की
चलो , चुराते है कुछ रंग
क्योकि , आज होली है
रंगों से भरी पिचकारी है
हर रंग में रंगी दुनिया सारी है
आज होली है 

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