सोमवार, 12 मार्च 2012

परीक्षा बनाम अग्निपरीक्षा

परीक्षा भवन में आज गहरा सन्नाटा था
रह रह कर मेरा दिल घबरा रहा था 
सुबह की घटनाओ को याद कर 
ना जाने क्यों आँखे भी फटी सी रह गई , जहा थी वही अचल सी मैं रह गई 
धडकनों की आवाज़ लगने लगी ऐसे 
नगाड़ो पर पड़ रहे हो हथोड़े जैसे 
एक सौ साठ प्रति मिनिट हो रही थी ह्रदय गति 
कुछ उपाय समझ ना आया , घूम गई मेरी मति 
कांप गई मैं पूरी की पूरी , हाथ पावँ थरथराने लगे 
सुबह के दृश्य चलचित्र की भांति मेरे सामने आने लगे 
सुबह सुबह गधा भी आज बांयें से गुजरा था 
निगोड़ी काली  बिल्ली ने भी रास्ता मेरे काटा था 
राशिफल भी कुछ अच्छा ना था , अनिष्ट के घटित होने का उसमे पक्का वादा था 
लेकिन फिर भी मै बड़ी बहादुरी से चली आई थी परीक्षा देने 
लेकिन अब ;
परीक्षा भवन के सन्नाटे से मेरा दिल घबरा रहा था 
अनिष्ट के घटित होने का ख्याल दिल में बार बार आ रहा था 
परचा मिलने में समय था अभी बाकी 
कि तभी मुझे याद आया , अरे !
आज सुबह तो आँख भी मेरी फड़की थी 
कोसने लगी मैं खुद को , किस बुरी घडी में मैंने घर से निकलने की  ठानी थी 
खैर , घडी ने साढे सात बजाए
पर्चे बांटने को सर परीक्षा भवन में आये 
मैं तेरहवे नंबर पर बैठी थी 
मन ही मन हनुमान चालीसा पढ़ रही थी 
कि अचानक ;
मेरी नजर मेरी बैंच पर लिखे अक्षर पर पड़ी 
मेरा मन जार जार रोने लगा 
बैंच पर लिखा था मेरा नंबर १३ 
शुभ अशुभ की दृष्टी से यह नंबर होता है अशुभ बड़ा 
इतना तो मुझे भी था पता 
आखिरकार सर मेरे करीब आये 
और ; मुझे परचा दिया 
माँ सरस्वती के स्मरण के साथ मैंने परचा देखा 
कि तभी ; 
परीक्षा भवन में हलचल हुई , सरसराहट हुई 
                       कोहराम मचा , कोलाहल हुआ 
प्रिन्सिपल रूम में आई 
पुछ्तात पर पता चला कि 
तेहरवे नंबर पर जो छात्रा बैठी थी 
परचा देखते ही बेहोश हो गई 

रविवार, 11 मार्च 2012

माँ हूँ तुम्हारी

एक कविता मेरे बेटे के नाम उसके जन्मदिन पर 
           चाहती हूँ मैं 
कि मेरी खुशियाँ तुम्हे लग जाये 
और , तुम्हारे दुखों को मैं अपना लू 
आँख में आये आंसू तुम्हारे 
तो अपनी पलकों में सहेज लू 
कही मिले ना आसरा तुझे 
तो अपने आँचल में समेट लू 
हंसो जब तुम 
तो तुम्हारी मुस्कुराहट को गले लगा लू 
जब ख़ुशी से चमके तुम्हारी आँखे 
तो उसे अपनी कामयाबी बना लू 
गलत राह भी ग़र चलो तुम 
तो वो राह भी तुम्हे चुनने ना दूँ 
क्योकि ;
माँ हूँ तुम्हारी 
चाहती हूँ तुम्हे परिपूर्ण देखना 

बुधवार, 7 मार्च 2012

माँ मुझे जन्म दो

माँ मुझे मत मारो
मैं तुम्हारा ही एक हिस्सा हु 
तुम्हारी कोख में पल रहा 
एक अधूरा ख्वाब हु मैं 
जिसे देख रही हो तुम पिछले तीन महीनों से
तुम चाहती हो वो कलाई 
जिस पर दीदी राखी बांधे
वो ललाट जिस पर दूज का टिका सजे 
और अब 
तुम्हारा मन विचलित है 
क्योकि तुम्हे मेरी पहचान हो गई है 
जब से तुम्हे मेरे बारे में पता चला है 
तुमने तैयारियां शुरू कर दी 
मुझे मार डालने की 
लेकिन माँ 
मेरा क्या कुसूर ?
तुम कहती हो 
पापा को वारिस चाहिए 
दादी को वंश बढ़ाना है 
लेकिन माँ 
ये तो बहाना है 
क्योकि प्रश्नचिन्ह तो तुम्हारे ही मन में है 
तुम खुद नहीं चाहती कि
मैं जन्म लू
माँ मुझे याद है 
जब तुम्हे पहली बार मेरा अहसास हुआ 
तुम बहुत खुश थी 
और मैं भी 
मैं जल्द से जल्द इस दुनियां में आना चाहती थी 
तुम्हारी गोद में समा जाना चाहती थी 
तुम्हारी मधुर आवाज़ 
कोमल स्पंदन
सब कुछ मुझे आनंदित कर देता था 
लेकिन धीरे-धीरे 
तुम्हारे ख्याल ख्वाब मुझे समझ आने लगे 
मैं नन्ही जान 
डर गई 
क्या होगा ?
जब तुम्हे मेरे अस्तित्व का पता चलेगा 
माँ, मेरा दम घुटने लगा तुम्हारे पेट में 
फंस गई मैं गर्भनाल की लपेट में 
अब तो मेरा दिल भी धड़कने लगा है 
मेरे नन्हे हाथ पावं आकार लेने लगे है 
माँ , मुझे आने दो 
मेरे रूप को देखकर तुम सब भूल जाओगी
मैं बेटा नहीं , तुम्हारा अभिमान बनुगी 
तुम विद्रोह करो माँ 
दादी से,पापा से,समाज से 
माँ तुम भी तो औरत हो 
फिर क्यों मुझे मारना चाहती हो 
क्यों शर्मिंदा करती हो 
अपनी ही कोख को 
लेकिन माँ 
अब मैंने भी फैसला कर लिया 
मैं कोई अभिशाप नहीं हु 
आउंगी तो सम्मान के साथ 
और जाउंगी तो अपनी मर्जी से 
तुम विद्रोह करो या ना करो 
लेकिन 
मैं करती हु विद्रोह 
तुम मुझे क्या गिराओगी 
मैं खुद जा रही हु तुम्हारी कोख छोड़कर 
मैं जा रही हु माँ 
हमेशा हमेशा के लिए ...........................................

मंगलवार, 6 मार्च 2012

आज होली है

आज होली है
सब रंगे एक ही रंग में
नकाब पे चढ़ गया एक और नकाब
पहले ही ना पहचाने जाते थे
अब तो पहचानना और मुश्किल हो गया
नकाबपोशों की इस दुनियां में
चलो चलते है
चुराते है कुछ रंग खुशियों के
और
सजाते है जिंदगी का इन्द्रधनुष
जला देते है होली
उन कडवी यादों की
जो गाती है दास्ताँ बेरंग से ज़ज्बातों की
चलो , चुराते है कुछ रंग
क्योकि , आज होली है
रंगों से भरी पिचकारी है
हर रंग में रंगी दुनिया सारी है
आज होली है