शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

मन उदास है

  आज मन उदास है
  सब कुछ मेरे पास है
  कोई आरजू ना आस है
  जाने क्यों
  फिर भी मन उदास है
  शायद
  रूखे मौसम का तकाजा है
  या फिर
  बेरुखियों का तमाचा है
  भागे मन , दौड़े मन
  बंज़र रेगिस्तान में ये कैसी प्यास है 
  आज मन उदास है 
  खुशियाँ बिखरी आस-पास
  दुखों से मन मेरा अनजान
  बाहर है संगीत तो अन्दर निश्वास है
  जाने क्यों
  आज मन उदास है
  रोज सजते सपने जिन आँखों में
  आज टकटकी लगी वीरानो में
  अपनों का मेला है
सपनो का रेलम-पेला है
फिर भी मन मेरा अकेला है
क्या ये आने वाले वक़्त की
कुछ अनहोनी आहट है
या फिर
मन नहीं ,
आज का मौसम ही उदास है 

1 टिप्पणी:

  1. हाँ ऐसा द्वंद्व सभी मन में चलता है शायद...... गहरे भाव ......

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