बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

कोई नहीं चाहता

बिना आगाज़ के ही अंजाम चाहते है लोग
बिना प्रयास के ही सफलता पा लेना चाहते है लोग
जिंदगी की दौड़ में जीत चाहते है लोग
लेकिन जीत के लिए मेहनत
...........................................कोई नहीं चाहता
दूसरों की खुशियों को छीन लेना चाहते है लोग
लेकिन अपनी खुशियों को बांटना
...........................................कोई नहीं चाहता
सोने की तरह चमकना चाहते है लोग
लेकिन कुंदन की भांति आग में तपना
.........................................कोई नहीं चाहता
आसमां को बाँहों में लेना चाहते है लोग
लेकिन ज़मीं पर पैर जमाना
.........................................कोई नहीं चाहता
मंजिल तक पहुँच जाना चाहते है लोग
लेकिन संघर्षों का मुकाबला
.........................................कोई नहीं चाहता
सफलता पर बधाइयाँ देते है लोग
लेकिन दुःख में सांत्वना देना
.........................................कोई नहीं चाहता
दूसरों को बात बात पर टोकते है लोग
लेकिन अपनी स्वतंत्रता का हनन
.........................................कोई नहीं चाहता
अपने महलों में घी के दियें जलाते है लोग
लेकिन टूटे आशियाँ को तिनके देना
.........................................कोई नहीं चाहता
दूसरों पर कटाक्ष करते है लोग
लेकिन अपने गिरेबाँ में देखना
.........................................कोई नहीं चाहता
चाँद तारों को छूना चाहते है लोग
लेकिन परिस्थितियों से समझोते 
..........................................कोई नहीं चाहता 

5 टिप्‍पणियां:

  1. सच कहा....

    बेहद सार्थक अभिव्यक्ति..

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  2. जो दूसरों को आगे बढ़ाना चाहता है,
    दूसरों की खुशियों में अपनी खुशी देखता है
    नकारात्मकता को नकार कर सदा
    सकारात्मक होने की कोशिश करे,वही
    अनुकरणीय है.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार,संगीता जी.

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