सोमवार, 19 दिसंबर 2011

दूनियाँ वाले

हम इतने भी बुरे ना थे 
जितना लोगो ने हमे बना दिया 
हम तो चाहते थे दूनियाँ को प्यार से जीतना ,
नहीं मालूम था कि .
खुद को ही हार जायेगे !
आये थे हम तो प्यार बाँटने 
लेकिन खुद ही बँट कर रह गए 
सोचा था  बुराई को  अच्छाई बना देगे 
नहीं मालूम था कि ;
खुद ही बुरे बन जायेगे !
चाहते थे लोगो के दिलों को रोशन करना 
लेकिन खुद ही अंधेरो में खोकर रह गए 
तकलीफ में हर किसी को दिया सहारा 
लेकिन अपने ग़मों में ,
सर टिकाने  हमे किसी का कंधा ना मिला 
दूसरो के पोंछते थे आंसू हम
लेकिन हमारे ही समंदर को कोई किनारा ना मिला !
लोगो को दिया करते थे दिलासे हम 
लेकिन ;
हमारे ही सब्र का बाँध हमी से टूट गया 
सबकी खुशियाँ बांटी , दुखो: में शरीक हुए 
लेकिन हमारी खुशियाँ किसी से देखी ना गई 
और ;
हमारे दर्द-ए-दुःख में लोगो ने हम से किनारा कर लिया !
सबकी महफ़िलों की शमां बने हम 
लेकिन;
हमारी ही महफ़िल किसी को रास ना आई 

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